शाम आई थी रात की घटा भी छाई थी,
चाँद भी चमक रहा आँख टिमटिमाई थी,
दिखरहे थे जुगनू और तारे भी चमक रहे,
भूख थी गजब मगर रसोई ना महक रहे,
छुप रहे थे लोग सब मैं खड़ा अकेला था,
कौन सी डगर चलूँ पर ना कोई सहेला था,
एक के बाद एक अनेकों रास्तों का परिचय,
जिसकी तलास थी उसके न मिलने की संसय,
आसुओ क्यूँ बेवजह निकल मजाक उड़ाती हो,
जब मैं तन्हा हो जाऊ तब क्यू नहीं आती हो,
दर्द तो दर्द था मगर सफ़र भी कुछ हम न था,
संकल्प छोड़ा नहीं क्योंकि विकल्प कम न था,
मुझे क्या पता था कि राह में आप मिल जाओगे,
जिन अंधेरो में गुम था उसका रास्ता बताओगे,
सुबह हुई तब भी आसुओ ने साथ नहीं छोड़ा,
तब गम के आँसू थे पर ख़ुशी ने नाता ना तोडा,
हरवक्त में अपने आप से इन्ही का साथ होता है,
बेवजह ही इंसान हालात से लड़े बिन रोता है,
रविवार या मंगलवार ना किसी के रंग अलग,
मजाक हो या तारीफ़ किसी के ना ढंग अलग,
होते है जब दुःख के आंसू तब बातें मजाक लगती,
सफलता मिली नहीं कि यही तारीफ़ बनके ठगती,
बावला इंसान न समझा और न समझ पायेगा,
जीत हार की लागी है ये भी समय निकल जायेगा।।
Friday, 12 August 2016
जीत हार की लागी है ये समय भी निकल जायेगा।
Thursday, 11 August 2016
पाप और पुण्य को पहचानें।
लोग कहते है कि समय नहीं बीत रहा है,
समय बिताने के लिए कोई अय्यासी, कोई नसेड़ी, कोई जुआ खेल अपना समय खीच रहा है।
कोई संस्था बना कोई संस्था को दान दे सेवा तो कोई परोपकार का दरिया सींच रहा है।
कोई देशभक्ति में स्वदेशी, मुनाफ़े से देशवासियों के लिए अखण्डता का खाका खीच रहा है।
मगर आश्चर्य की बात ये है कि जब तक धरती है तब तक जीने की चाहत लिए जी रहा है।
भगवान आपको लम्बी उमर सुख शांति स्वाभिमान यस कीर्ति दे जियो जीने में क्या बुराई है।
मगर पुण्य परोपकार अय्यासी नशेबाजी देशभक्ति नहीं पुण्य वही कि किस तरह की कमाई है।
जीव हो तो गलतियां होगी ही पर हत्याएं शेर की तरह उतनी ही करो जितने की तुम्हे जरुरत हो।
चूहों की तरह मत भरो ख़जाना मत काटो कच्ची फ़सल जो इस प्रकृत में अत्यधिक खूबसूरत हो।
कर लिया धन बेसुमार इस दुनियां में जब संभला नहीं तो मन हुआ अशांत अब लगे खैरात बाटनें।
भूख लगी थी गज़ब की खा लिए तेल नीम गुड़ अनाज जब तीखा हुआ स्वाद तो लगे शहद चाटने।
समय बिताने के लिए सुरा सुंदरी जर जमीन की जरुरत नहीं सिर्फ मन में शांति होनी चाहिए।
आप कीर्तिवान हो उसके लिए लाखों वर्ष उम्र दान दया की आवश्यकता नहीं सत्यकर्म चाहिए।।
गौतम बुद्ध राजा हरिश्चंद्र विक्रमादित्य अशोक सम्राट को हम धन नहीं कर्म के लिए जानते है।
तुलसी कबीर रसखान सूरदास रविदास थे तो निर्धन मगर आज आप उन्हें भी महान मानते है।
मत भागो कीर्तिमान होने के पीछे सिर्फ कर्म करो जीना है अगर इस दुनियां में आसमां के नीचे।
गीता का ज्ञान लो सत्यकर्म करो मत भागो ऊचाइयों के लिये कि कोई कुत्ता टांग पकड़कर खीचे।।
Monday, 8 August 2016
हिन्दू साजिस से आहत है न कि शत्रु से।
क्या हमें परेशान किया जा रहा है ? ये सब एक साजिस तो नहीं। ऐसा क्यों होता है कि विदेशी मीडिया महा शिवरात्री में किसी समुदाय के दूध चढ़ाने पर बोलती है, लाखो लीटर दूध पत्थर पर फेका जा रहा है और लाखों बच्चे भूखे है, यदि यह दूध नहीं चढ़ाया जाता तो लाखो जिंदगियां बच जायेगी, लेकिन यही लोग जब गाय काटी जाती है तो नहीं बोलते कि, यदि यह गाय बची रहती तो पुरे जीवन में कितना दूध देती, उससे कितने लोगो की जान बचाई जा सकती है।
जब लोग होली में रंगो से अपना पर्व मनाते है तो यही विदेशी पैसों से चलने वाले लोग बोलते है, इस त्यौहार पर लाखो लीटर पानी बरबाद हो जाता है। यदि यही पानी सूखा पीड़ितों को दिया जाता तो लाखो जाने तरोताजा हो जाती, लेकिन ये नहीं बोलते कि मुहर्रम या ईद पर मासूम बच्चों या जानवरों के साथ अमानवीयता से कितना पानी बचता। और इससे कितने लोगो का फायदा होता। मैं किसी धर्म या प्रथा का बिरोधी नहीं सब लोग अपना अपना त्यौहार हर्षो उल्लास से मनाये माँ को बड़ी ख़ुशी होगी।
दीवाली में सिर्फ एक देश के कुछ लोग पटाखे फोड़ते है तो यही मीडिया बोलती है। इन पटाखों से इतना पलूशन होगा कि लोगो को दमा होकर जाने जा सकती है, लेकिन नए साल में पूरा विष्व जब आतिशबाजी करता है तो उससे पलूशन नहीं भड़वे जश्न बताते है बोलते है आज पूरा विष्व नए वर्ष का स्वागत कर रहा है जश्न मना रहा है।
कुछ लोगो द्वारा जब किसी मासूम अबोध बच्चों का जननांग काटा जाता है तब क्या उसे धर्म के बारे में पता होता है ? क्या उसमे उसकी रजामंदी होती है? क्या यह मानवाधिकार का उलंघन नहीं है? और इसका दुष्परिणाम होता है कि एक अधूरा आदमी पुरे आदमी से नफ़रत करने लगता है। क्योंकि बचपन में पता नहीं वह क्या बनना चाहता था और उसे क्या बना दिया गया। फिर तो मरता क्या न करता। एक का कट जाता है तो वह दूसरे का भी काट देता है, रॉड ख़ुशी जब सबका मरै।
एक हिन्दू सिख ईसाई बौद्ध या जैन आदि अपनी स्वेक्षा से धर्म के प्रति आस्था रखता है। लेकिन अधूरे इंसान की यही मजबूरी है कि, जो कभी पूरी नहीं हो सकती इसलिये सिर्फ नफ़रत ही बचती है। जिसे कभी न तो विदेशी पैसो से चलने वाली मीडिया बोल सकती है और न ही देशद्रोही विदेशी चंदाचोर नेता। बोलेगे तो सुबह पिट जायेगे या कंगाल हो जायेगे।
मैं उनके लिए माँ से प्रार्थना करूँगा कि अपने दुःख को किसी के ऊपर न थोपने की उन्हें प्रेरणा दे! अपने अधूरेपन की जलन से किसी मासूम को अधूरा न बनाये।
तो क्या इस देश के लोगो के साथ साजिस हो रही है हिन्दू मुस्लिम सिख आदि को आपस में लड़ाने की.....लगता तो ऐसा ही है कि विदेशी ताकते देश में कुछ लालची कुत्तो के सामने पैसा फेककर लड़ा रही है। आप का कर्तव्य है कि ऐसे लोगो को देखना सुनना बंद कर दे देश में धार्मिक लड़ाई अपने आप बंद हो जायेगी और देश एक महान राष्ट्र।
जय हिन्द! जय भारत!
Wednesday, 3 August 2016
आरक्षण की आड़ में धनिकों का गजब हैं खेल, क्षत्रिय, ब्राह्मण, बैश्य और हरिजन सभी मांगे तेल।
आरक्षण की आड़ में धनिकों का गजब हैं खेल,
क्षत्रिय, ब्राह्मण, बैश्य और हरिजन सभी मांगे तेल।
मुर्ख है वे लोग जो कहते है आरक्षण चाहिए,
जिंदगी भर गुलामी और भीख में क्षण चाहिए।
दोस्त ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए ही नही होती,
समझ हर बात समझाने के लिए ही नही होती।
याद तो अक्सर आती रहती है आप हिन्दुओं की,
मगर सचेतो हर याद जताने के लिए नही होती।।
आज नया कुछ भी नहीँ है यारों वही दिल पुराना है।
तुम्हे समझाने की कोशिश मगर समझ न आना है।।
फासलों से अगर मुस्कुराहटें लौट आये, तुम्हारी।
तो तुम्हें हक़ है कि तुम दूरियाँ बना लो मुझसे..।।
जब भी करीब आता हूँ बयां दिल सुनाने के लिए,
जिंदगी दूर रखती हैं न जाने किसे सताने के लिये!
महफ़िलों की शान धनिकों का गुलाम न समझना,
मैं तो अक्सर हँसता हूँ खुद गम छुपाने के लिये।
जख्म तो हम भी अपने दिल में तुमसे गहरे रखते हैं!
मगर हम जख्मों पे मुस्कुराहटों के पहरे रखते हैं!!
यार नफरत करने वाले भी गज़ब का प्यार करते हैं।
सच में जब भी मिलते हैं कहते हैं तुम्हें छोड़ेंगे नहीं।।
न्याय बिकता है यहाँ झूठ भी बेच देते है लोग,
सब तो सब गुम्बारो भरकर हवा भी बिक जाता है।
आकाश तालाब तीनो लोको में फैला है पानी,
मगर बोतल में बंदकर यहाँ पानी भी बिक जाता है।।
समझते हो नेता लोग तुम्हे आरक्षण खैरात में देते है।
तुम्हारी जिंदगी में ग़ुलामी दे मलाई खुद चाट लेते है।।
कहते है जाति के आधार पर हम देते है आरक्षण,
उकसा लड़ाते है कि हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।
मगर कोई बच्चा पैदा होते ही पूँजीपति क्यों?
यहाँ एक बच्चा अरबपति दूसरा कीड़ो सा बेकार है।।
दम है तुझमे समानता लाने की तो मुझसे बात कर,
सभी के मरने पे उसकी आधी संपत्ति देश में बांट कर।
आधी संपत्ति उसके बच्चों को अवश्य देना चाहिए,
बढ़ती खाई को पाट मानवता का रूप होना चाहिए।
है किसी सरकार या नेता में ऐसा कर दिखाने का।
पागलों जागो नेता सिर्फ कुर्सी के लिए लड़ाने का।
निन्यानबे प्रतिशत धन एक प्रतिशत लोगो में है,
सम्पदा सभी में बराबर बाटें या आरक्षण चाहिए।।
आदर्श व्यवस्था निर्भीक संविधान की नीति बढ़ाए,
अमीरी गरबी नफ़रत मिटा मानवता का दीप जलाए।।
प्रकृति ब्रह्माण्ड की किसी भी सम्पदा का बंटवारा नहीं करती है, बंटवारा अपनी सुविधा के अनुसार सरकार कराती और करती है। जिसमें उसे पर्याप्त सम्पदा शक्ति का लाभ होता है, इसी के सहारे अमीरी गरीबी का जन्म होता है। अन्यथा मानव के अलावा किसी भी जीव में अमीरी गरीबी का चलन नहीं है, इस चलन को चालू रखने का नाम है आरक्षण, जब तक ऐसी प्रथा रहेगी तब तक जनता आपस में लड़ेगी और गरीब की गरीबी कभी नहीं मिटेगी। यदि सत्य मार्ग पर चलना है तो सम्पदा का समान रूप से बंटवारे के लिए नेता चुनें न की आरक्षण का चम्मच चटाने वाला ठग, जिस दिन जनता को मेरी बातों का एहसास हो जायेगा, उस दिन से ठगी लालच का अंत हो जायेगा। दुनियां में ऐसा भी हो सकता है, कि यदि कोई व्यक्ति का देहांत हो तो उसकी संपत्ति का आधा हिस्सा पुरे देश के लोगो में बाट दिया जाय और आधा उसकी संतानो को, जिसका परिणाम यह होगा की धीरे धीरे समानता बढ़ेगी और नफ़रत कम होगी। यदि यह विचार उचित है तो इसका प्रचार प्रसार करें...!!!
Tuesday, 26 July 2016
ब्राह्मणत्व से हिंदुत्व और हिंदुत्व से पूरे ब्रह्माण्ड को अपने में समाहित करें..!!!
आप सोच रहे होंगे आदर्श व्यवस्था निर्भीक संविधान की बात करते करते मैं सर्व ब्राह्मण उत्थान समिति की बातें कैसे करने लगा? सबसे पहले यह समझना होगा कि आदर्श व्यवस्था निर्भीक संविधान की परिकल्पना है कि प्राकृतिक संविधान जहाँ किसी में भी भेदभाव नहीं हो जैसे आँधी या सुनामी आती है तो क्या प्रकृत यह देखती है कि सामने दलित, ब्राह्मण, हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, शेर, हाथी, कुत्ता या बिल्ली है वह सबके साथ समान व्यवहार करती है। लेकिन एक बात है जंगल में हिरन भी रहता है शेर भी, स्वाभाविक है कि शेर हिरन का शिकार करेगा तो क्या प्रकृत का संविधान शेर को सजा देता है ? नहीं न फिर तो हिरन के साथ अन्याय हुआ, तो ऐसे संविधान से क्या लाभः..? मगर शेर को सजा दिया गया तो शेर क्या खायेगा..? बगैर खाये भूखे एक दिन मर जायेगा, तो क्या शेर के साथ अन्याय नहीं हुआ...? फिर तो प्राकृतिक संविधान बनना असम्भव होगा। कभी ऐसे ही ख्याल मुझे भी आते थे मगर अब मैं सोचता हूँ संभव है। क्योंकि संविधान मानव हित के साथ साथ अन्य सभी प्राकृतिक प्राणियों, वस्तुओँ पर दयावान होगा तो किसी भी प्रकार की कोई अड़चन नहीं होगी।
अब आप सोचें आज की प्राकृतिक ढांचा क्या है क्या ब्राह्मण उस ढांचे से अलग है तो ब्राह्मण हित की बात तो अनुचित नहीं होगी मगर सिर्फ ब्राह्मण हित और मानव अहित कभी भी उचित नहीं, मगर कभी भी कही भी कुछ हासिल करना है तो छोटी छोटी मंजिले पार करनी होती है, जिसने घर की चौखट नहीं पार की वह कभी रास्ते पर नहीं होगा और बगैर रास्ते पर आये कोई मंजिल नहीं मिलती और जब पहली मंजिल मिलती है तो इंसान सोचता है मेरा मकसद ये नहीं उसे पाना था और कूच कर देता है अगली मंजिल के लिए।
आप सभी वर्ग धर्म के लोग एक अपने आस पास छोटे छोटे समूह से जुटे और उसका नेतृत्व करें! नेतृत्व करने वाले का कर्तव्य है कि वह अपने से बड़े समूह से जुड़े और अपने साथियों को जोड़े, तभी सेल्फ एंड मचुअल डेवलपमेंट की बात होगी। कभी भी जाति आधारित समूह होना असामाजिक नहीं यदि मकसद सामाजिक है तो ब्राह्मणों ने सदैव बोला है मेरा कल्याण हो मेरी जाति का कल्याण हो मेरे धर्म का कल्याण हो और पूरे विश्व का कल्याण हो, इसीलिए आज हिन्दू धर्म विद्वानों का धर्म है। इससे अधिक दार्शनिक धर्म कोई नहीं इसीलिये कुछ विद्वानों ने यहाँ तक कहा कि एक दिन हिंदुत्व ही बचेगा भले ही उसका नाम कुछ अलग हो मगर विचार यही होगा।
पढ़े इन पश्चिमी philosophers को :-
1. *लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910):*
"हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है"।
2. *हर्बर्ट वेल्स (1846 - 1946):*
" हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा। तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी। सलाम हो उस दिन को "।
3. *अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 - 1955):*
"मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है"।
4. *हस्टन स्मिथ (1919):*
"जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी"।
5. *माइकल नोस्टरैडैमस (1503 - 1566):*
" हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा"।
6. *बर्टरेंड रसेल (1872 - 1970):*
"मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है । हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा "।
7. *गोस्टा लोबोन (1841 - 1931):*
" हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ"।
8. *बरनार्ड शा (1856 - 1950):*
"सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी । अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा "।
9. *जोहान गीथ (1749 - 1832):*
"हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही असली धर्म है ।मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ।"
पुरे मानवता के कल्याण हेतु एक दूसरे से प्रेम भाव रखना और जुड़ना ही मात्र एक उपाय है इसलिए सदैव जुड़ने का प्रयास करें टूटने का नहीं जो भी आप को जोड़े उसके साथ जुड़े...!
Thursday, 21 July 2016
हिन्दू हित का शपथ लिया याद वह दिलाने निकला हूँ, यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।
वीरों की है जन्म भूमि इतिहास बताने निकला हूँ,
यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।
गुरु गोविंद सिंह के दो बेटे चुनवा गए दीवारों में,
दो वीरगति को प्राप्त हुए जो वीर रहे हजारों में।
माँ बोली चारो बेटों ने कर दी मेरी गोद को सुनी,
खड़े हजारों बेटों ने गुरु का सम्मान करी दूनी।
गुरु ने बोला ऐ भारत माँ ना थे वे मेरे चार,
मेरे तो ये बेटे देखो आज खड़े है कई हजार।
भारत के लालों का स्वभिमान बताने निकला हूँ,
यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।।
ऐसी सीख सिखाया गुरु ने जाग उठा पंजाब,
भीख मांगने से अच्छा कर्म से छीनो ख़वाब।
पंजाबी ने मन में बस एक ही बात को ठानी है,
बिना परिश्रम रोटी खाये सबसे बड़ा अज्ञानी है।
ऐसे पंजाब को कुछ लोगों ने लालच में डूबाया,
हिन्दू हित की बात परे भारत माँ को भुलवाया।
धरती वीर भगत सिंह की जगह नहीं गद्दारों की,
देश की खातिर जान लुटाना हसरत है दिलदारों की।
आज मैं उसको गुरु की याद दिलाने निकला हूँ,
यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।
बंदेमातरम दूर रहा अब भारत माता से परहेज,
कश्मीर में जले तिरंगा कहते आजादी है खेद।
गौ माताकी पूछ कहाँ जब राष्ट्रगान स्वीकार नहीं,
जिस पैसों से हज पर जाएं दाग़ लगाएं बैठ वही।
हिंदुस्तान की रोटी पर अपना अधिकार जताते है,
वही लोग भारत माँ को डायन कहकर बुलाते है।
जन्नत जाने वालों का हम आज टिकट कटवाएंगे,
पत्थर फेंकने वाले सुन लें हम फूल नहीं वर्षायेगें।
भारत का हरेक सिपाही तुझे सिखाने निकला है,
यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।
पाकिस्तान डराता सूरज को लेकर कुछ अंगारे,
मुस्लिम वोट पर मर मिटते कुछ नेता चोर हमारे।
ये दुशाद अब बोल रहे करवा लो जन मत संग्रह,
जूते मारो इन दुष्टों को करने आया हूँ मैं आग्रह।
तीन सौ सत्तर की खातिर देश का साथ निभाओ,
देशद्रोही आयेगा वोट मांगने जूते मार भगाओ।
दूध पिलाना बंद करूँगा अब आस्तीन के साँपों को,
चौराहों पर गोली चलवा दूँगा सत्तर साल के पापों को।
हिन्दू हित का शपथ लिया याद वह दिलाने निकला हूँ,
यूपी की माटी से चल पंजाब सुनाने निकला हूँ।
Wednesday, 13 July 2016
भय ब्रेक और अनुशासन में क्या अन्तर है..??
हिन्दू जब भावनाओं में बहता है तो साधू संत योगी बनकर समाज की सेवा करता है मगर मुस्लिम आतंकी बन दुष्टता, अत्याचार, अपराध को गले लगता है क्यों?? क्या कभी आपने सोचा है, नहीं तो आगे पढ़े! हर इन्सान में डर होता है अपने अधिकारों के प्रति जब यही भय या डर को फियर बोले तो, (Fear) का दो व्याख्या है एक Forget Everything And Run दूसरा Face Everything And Rise समस्याओं की अनदेखी करो और आगे बढ़ो, या समस्यायों पर विजय प्राप्त करते हुए संघर्ष करो। दोनों चीजे आपके पास है चुनना आपको है जैसी जिंदगी जीना है वैसी चयन करें। मगर एक बात नहीं भुलानी चाहिए कि आँख बंद कर लेने से अँधेरा नहीं हो जाता है। आज हमारे समाज में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने में आता है कि लोग अपनी सुविधानुसार आँखे खोलते और बंद करते है और कहते है देश बदल रहा है, मेरा देश बिगड़ रहा है। और सुख की अनुभूति नहीं होती क्योंकि हम सुख प्राप्ति हेतु कपड़े बदलते है, गाड़ी बदलते है, दोस्त बदलते है, मकान बदलते है मगर स्वभाव नहीं बदलते और चाहते है संतुष्टि मिल जाय दुःख छट जाय सुख आ जाय।
सुख की खोज में दिन रात भटकता इंसान जब कुछ ज्ञान अर्जित कर लेता है तब भयमुक्ति का मार्ग खोजता है, क्योंकि जब तक भय है तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते ऐसे में जीने के लिए अनुशासन जिसे टेक्निकल भाषा में ब्रेक बोलते है। जैसे किसी गाड़ी में ब्रेक होता है, जो सिर्फ और सिर्फ गाड़ी को रोकता है जब भी ब्रेक कार्य शुरू करेगा तो गाड़ी चल नहीं सकती मगर ब्रेक भी उतना ही जरुरी है जितना गाड़ी में इंजन। यदि ड्राइवर ब्रेक लगाकर बैठे तो गाड़ी नहीं चलेगी जिसे कहते है भय। समयानुसार उचित मार्ग देखकर ब्रेक पर से दबाव समाप्त करना और गतिवर्धन के लिए इंजन को उत्तेजित करने को ही अनुशासन कहते है। यही अनुशासन ज्ञान पर आधारित होता है जो हमें हमारे धार्मिक ग्रन्थों से मिलता है।
अतीत में जो कुछ भी हुआ, वह अच्छे के लिए हुआ, जो कुछ हो रहा है, अच्छा हो रहा है, जो भविष्य में होगा, अच्छा ही होगा। अतीत के लिए मत रोओ, अपने वर्तमान जीवन पर ध्यान केंद्रित करो , भविष्य के लिए चिंता मत करो।
जन्म के समय में आप क्या लाए थे जो अब खो दिया है? आप ने क्या पैदा किया था जो नष्ट हो गया है? जब आप पैदा हुए थे, तब आप कुछ भी साथ नहीं लाए थे। आपके पास जो कुछ भी है, आप को इस धरती पर भगवान से ही प्राप्त हुआ है। आप इस धरती पर जो भी दोगे, तुम भगवान को ही दोगे। हर कोई खाली हाथ इस दुनिया में आया था और खाली हाथ ही उसी रास्ते पर चलना होगा। सब कुछ केवल भगवान के अंतर्गत आता है।
आज जो कुछ आप का है, पहले किसी और का था और भविष्य में किसी और का हो जाएगा। परिवर्तन संसार का नियम है।
आप एक अविनाशी आत्मा हैं और एक मृत्युमय शरीर नहीं है। शरीर पांच तत्वों से बना है - पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश। एक दिन शरीर इन तत्वों में लीन हो जाएगा।
आत्मा अजन्म है और कभी नहीं मरता है। आत्मा मरने के बाद भी हमेशा के लिए रहता है। तो क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? आप किस बात से डर रहे हैं? कौन तुम्हें मार सकता है?
केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर के लिए अपने आप को समर्पित करो। जो भगवान का सहारा लेगा, उसे हमेशा भय, चिंता और निराशा से मुक्ति मिलेगी।
मुस्लिमों के विषय में हमारे अनेकों महापुरुषों ने अपनी विचारधारा को हमें बताया है।
स्वामी विवेकानन्द:-
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।
---कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२
महर्षि दयानन्द सरस्वती:-
इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।
-- सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१
महर्षि अरविन्द:-
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
--ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६
सरदार वल्लभ भाई पटेल:-
मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
-संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार ।
बाबा साहब भीम राव अंबेडकर:-
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
- प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१
गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर:-
ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं ।
- रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर
मोहनदास करम चन्द्र गांधी:-
मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।
-गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग
लाला लाजपत राय:-
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें।
- पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५
राजा राममोहन राय:-
मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।
- वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७
इसके बाद भी यदि हम भयमुक्त होकर अनुशासन को अपनाते हुए अपने ब्रेक पर से दबाव नहीं कम करते है तो भविष्य क्या होगा समय हो तो अभी सोचें अन्यथा देर हो जायेगी। समय व्यर्थ करने से नहीं सदूपयोग करने से शांति मिलेगी।