Wednesday, 13 July 2016

भय ब्रेक और अनुशासन में क्या अन्तर है..??

हिन्दू जब भावनाओं में बहता है तो साधू संत योगी बनकर समाज की सेवा करता है मगर मुस्लिम आतंकी बन दुष्टता, अत्याचार, अपराध को गले लगता है क्यों?? क्या कभी आपने सोचा है, नहीं तो आगे पढ़े! हर इन्सान में डर होता है अपने अधिकारों के प्रति जब यही भय या डर को फियर बोले तो, (Fear) का दो व्याख्या है एक Forget Everything And Run दूसरा  Face Everything And Rise समस्याओं की अनदेखी करो और आगे बढ़ो, या समस्यायों पर विजय प्राप्त करते हुए संघर्ष करो। दोनों चीजे आपके पास है चुनना आपको है जैसी जिंदगी जीना है वैसी चयन करें। मगर एक बात नहीं भुलानी चाहिए कि आँख बंद कर लेने से अँधेरा नहीं हो जाता है। आज हमारे समाज में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने में आता है कि लोग अपनी सुविधानुसार आँखे खोलते और बंद करते है और कहते है देश बदल रहा है, मेरा देश बिगड़ रहा है। और सुख की अनुभूति नहीं होती क्योंकि हम सुख प्राप्ति हेतु कपड़े बदलते है, गाड़ी बदलते है, दोस्त बदलते है, मकान बदलते है मगर स्वभाव नहीं बदलते और चाहते है संतुष्टि मिल जाय दुःख छट जाय सुख आ जाय।

सुख की खोज में दिन रात भटकता इंसान जब कुछ ज्ञान अर्जित कर लेता है तब भयमुक्ति का मार्ग खोजता है, क्योंकि जब तक भय है तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते ऐसे में जीने के लिए अनुशासन जिसे टेक्निकल भाषा में ब्रेक बोलते है। जैसे किसी गाड़ी में ब्रेक होता है, जो सिर्फ और सिर्फ गाड़ी को रोकता है जब भी ब्रेक कार्य शुरू करेगा तो गाड़ी चल नहीं सकती मगर ब्रेक भी उतना ही जरुरी है जितना गाड़ी में इंजन। यदि ड्राइवर ब्रेक लगाकर बैठे तो गाड़ी नहीं चलेगी जिसे कहते है भय। समयानुसार उचित मार्ग देखकर ब्रेक पर से दबाव समाप्त करना और गतिवर्धन के लिए इंजन को उत्तेजित करने को ही अनुशासन कहते है। यही अनुशासन ज्ञान पर आधारित होता है जो हमें हमारे धार्मिक ग्रन्थों से मिलता है।

अतीत में जो कुछ भी हुआ, वह अच्छे के लिए हुआ, जो कुछ हो रहा है, अच्छा हो रहा है, जो भविष्य में होगा, अच्छा ही होगा। अतीत के लिए मत रोओ, अपने वर्तमान जीवन पर ध्यान केंद्रित करो , भविष्य के लिए चिंता मत करो।
जन्म के समय में आप क्या लाए थे जो अब खो दिया है? आप ने क्या पैदा किया था जो नष्ट हो गया है?  जब आप पैदा हुए थे, तब आप कुछ भी साथ नहीं लाए थे।  आपके पास जो कुछ भी है,  आप को इस धरती पर भगवान से ही प्राप्त हुआ है।  आप इस धरती पर जो भी दोगे, तुम भगवान को ही दोगे।  हर कोई खाली हाथ इस दुनिया में आया था और खाली हाथ ही उसी रास्ते पर चलना होगा। सब कुछ केवल भगवान के अंतर्गत आता है।
आज जो कुछ आप का है,  पहले किसी और का था और भविष्य में किसी और का हो जाएगा। परिवर्तन संसार का नियम है।
आप एक अविनाशी आत्मा हैं और एक मृत्युमय शरीर नहीं है।  शरीर पांच तत्वों से बना है - पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश।  एक दिन शरीर इन तत्वों में लीन हो जाएगा।
आत्मा अजन्म है और कभी नहीं मरता है।  आत्मा मरने के बाद भी हमेशा के लिए रहता है।  तो क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? आप किस बात से डर रहे हैं?  कौन तुम्हें मार सकता है?
केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर के लिए अपने आप को समर्पित करो।  जो भगवान का सहारा लेगा, उसे हमेशा भय, चिंता और निराशा से मुक्ति मिलेगी।

मुस्लिमों के विषय में हमारे अनेकों महापुरुषों ने अपनी विचारधारा को हमें बताया है।

स्वामी विवेकानन्द:-
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।
---कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२

महर्षि दयानन्द सरस्वती:-
इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

-- सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

महर्षि अरविन्द:-
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
  --ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

सरदार वल्लभ भाई पटेल:-
मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
     -संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार ।

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर:-
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
- प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर:-
ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं ।
- रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

मोहनदास करम चन्द्र गांधी:-
मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।
-गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग

लाला लाजपत राय:-
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें।
- पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५
राजा राममोहन राय:-
मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।
  - वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

इसके बाद भी यदि हम भयमुक्त होकर अनुशासन को अपनाते हुए अपने ब्रेक पर से दबाव नहीं कम करते है तो भविष्य क्या होगा समय हो तो अभी सोचें अन्यथा देर हो जायेगी। समय व्यर्थ करने से नहीं सदूपयोग करने से शांति मिलेगी।

Tuesday, 12 July 2016

अज्ञानता नफ़रत रूढवादिता से उपजी ग़रीबी

अधिक बच्चे पैदाकर गरीबी के कारण उचित परवरिस न दे पाना।
गरीब बच्चों का आतंक प्रचारक हरामी मुल्लों के सम्पर्क में आना।।
हर अमन पसंद हिंदुस्तानी के लिए कफ़न का इंतजाम कर रहा है।
आतंक इतनी तेजी से बढ़ रहा है मगर अफशोस हिंदुस्तान सो रहा है।।

हर साधारण व्यक्ति यही सोचता है जो कुछ हो रहा है वह स्वाभाविक है, ऐसी परिस्थिति में अपने लिए जो कुछ भी स्वार्थसिद्धि हो जाय वही बेहतर है लेकिन यही ख़याल हमें और भी कठिन और दुर्लभ मार्ग प्रदान करता है। जैसे स्कूलों में विद्यार्थियों को नक़ल कराना, नक़ल से डिग्री लिए लोगों को सफल बनाना। हमें यह सब साधारण सी बात लगती है मगर ये उतनी साधारण है नहीं जितनी दिखती है, क्योंकि इन बातों के पीछे अच्छीखासी प्लानिंग होती है राजनैतिक मैनेजरों की, आप सोंचते होंगे नेताजी इतना सीधासाधा है इनके पास इतना शातिर दिमाग हो ही नहीं सकता, तो आप ज्यादा कुछ गलत नहीं सोचते है, हर पार्टी, हर बड़े नेता के पास योग्य प्लानर, मेनेजरर्स होते है जो इस तरह की बातों को सोचते है और करवाते है। समाज में किसी भी एक अयोग्य व्यकि की नौकरी लगवाने के पीछे मकसद होता है कि शिक्षा प्रणाली को कमजोर बनाना वर्ना यदि लोग जानने समझने लगे तो बेवकूफ बनाना मुश्किल होगा, दूसरा लक्ष्य होता है लोगो को लालची बनाना, आसानी से कोई मंजिल मिल जाना उतना ही घातक है समाज के लिए जितना की किसी भरी भीड़ में बम विष्फोट होने पर कुछ का मरना और कुछ का बच जाना। यही सब हमें आजादी के बाद से मिला है जिसके लिए स्वार्थी नेताओं का हाल कुछ बिगड़ सा गया है। और अब उनके ख्यालात कुछ ऐसे हो गए है।

हम पांच नहीं पच्चीस राज्य हारेंगे।
मगर अपनी आदत नहीं सुधारेगें।।

बाटला हॉउस एन्कोउन्टर पर सोनिया जी फूट फूट कर रोयीं।
सलमान खुर्शीद बोले ऐसे कुकर्मो से कभी कांग्रेस ने सत्ता नहीं खोई।।

हजारों वर्षो से विदेशी शासको ने हिन्दुस्तानियों का संघार किया।
कांग्रेस ने भगवा आतंक बता मुस्लिम आतंकियों का उद्धार किया।।

विदेशी शासको और कांग्रेसी शासको के अत्याचार में बस एक ही अंतर।
विदेशियों ने हिन्दुस्तान लूटा और कांग्रेस ने हिंदुओ के पेट में भोका खंजर।।

कांग्रेस ने देश लूटने के लिए सेक्युलेरिस्म का लुटेरों को पाठ दिया।
और सारे हरामी लालची हिंदुओ ने ऐसे लोगों का ही तलवा चाट लिया।।

यही लालचिपन से ही जन्म लेता है आतंक और आतंक ही नहीं सारी असामाजिक समस्याएं,अभी हम उस आतंकवाद की बात कर रहे है जिसे अमेरिका में टेररिज्म, पाकिस्तान में ज़िहाद और हिंदुस्तान में सेक्यूलेरिज्म बोला जाता है। क्योंकि लोग सोचते है मौत को मेरे घर का पता ठिकाना ज्ञात नहीं वह मेरे घर आ ही नहीं सकती, यही भ्रम है जो अपराध को अमृत पिलाता है। लेकिन सोचने की बात है कि क्या हमारी अज्ञानता हमें बेहतर भविष्य प्रदान करेगी? कभी नहीं हमें उन लोगो को समझाना चाहिए जो ग़रीबी को अपनी जीवनी समझने लगे है, जो लोग यह सोचते है कि दस बच्चे होंगे और एक एक हजार भी कमाकर देगें तो दस हजार का इनकम होगा। दसों भीख भी मांगेंगे तो नहीं कुछ पांच हजार तो बचाएंगे ही, यही ऐसे ही कुछ विचार आते है ग़रीबो को ग़रीबी में। इतने ही विचार से समाज को पूरा नुकसान नहीं, नुकसान तो तब शुरू होता है जब इन्हें गरीब बनाने वाला इनका आका मिल जाता है जो ज्ञान देकर ज्यादा बच्चे पैदा करवाता है, वही इनके दिलों में नफ़रत पैदा करता है, इंसानो को इंसानो से अमीरी गरीबी के नाम पर जाति के नाम पर, धर्म के नाम पर लड़वाता है। सोचने की बात है लड़ने वाला सिर्फ और सिर्फ जेल या मौत को गले लगता है और लड़वाने वाला नेता मंत्री या धर्म गुरु बन जाता है।

आज कल एनजीओज़ भी इस तरह चल रहे है। एक एनजीओज किसी भी एक गांव के लोगो के बारे में भलीभांति जानकारी हासिल करता है जिस व्यक्ति को टारगेट करना होता है उसका भूत वर्तमान और भविष्य अच्छी तरह पढ़ता है फिर उस गांव में जाकर बच्चों को टाफियां, बड़ो को कुछ गिफ्ट और बूढ़ो के ऊपर खूब प्यार लुटाता है और बताता है कि हमें अल्ला ने भेजा है आप सभी लोगो की मदत के लिए, इतना कहते हुए अपने टार्गेटेड व्यक्ति को बुलवाता है उसका सारा भूतकाल बताता है तो लोग और भी अल्ला पर विश्वास करने लगते है तो एनजीओ वाला बोलता है अल्ला ने अभी एक व्यक्ति को मेरे द्वारा मदत भेजा है और बोला है आप सभी अल्ला की शरण में आ जाओ तब अल्ला खुद आकार सीधा आप सभी की मदत करेगा। एक व्यक्ति की मदत होते देख सभी लोगो के मन में लालच बढ़ता है और हो सकता है ठगे न जाय परंतु कुछ ठगे भी जाते है। ठगे जानेवाला कुछ नहीं पाता है मगर एनजीओ वाला जरूर मालामाल हो जाता है।

सब का एक ही मकसद है इन्सानो में नफ़रत बढ़ाकर अपने को धनवान होना। आप चाहे तो लोगो में जागरूकता ला सकते है भीख मांगने वाले अक्सर मिलते होंगे उन्हें मदत दे मगर बगैर उपदेश दिए भीख देना एक और भिखारी उत्पन्न करता है। आप बोलेंगे कि मेरे पास टाइम नहीं है, भाई जब पैसा आपने कमाया तो टाइम लगा था या हराम का मिल गया? यदि हराम का मिला तो कोई बात नहीं यदि मेहनत लगी हो तो उसका सदुपयोग करें बर्बाद नहीं। औरतें बच्चों से भीख मंगवाते मिल जाती है उनकी भी मदत करें मगर गर्भनिरोधक गोली भी साथ में दे जो सरकारी अस्पतालों पर मुफ़्त भी मिलती है उसे अपने पास टॉफी जैसा रखें। हर किसी एनजीओज का भलीभांति तहक़ीक़ात करें और गलत एनजीओज की जानकारी पुलिस या सम्बंधित विभाग को दें!आपका एक प्रयास अमीरी ग़रीबी के बीच की खाई कम कर सकता है इंसानो के बीच बढ़ रहे नफ़रत को मिटा सकता है।

Friday, 8 July 2016

गुलामों को गुलामी का एहसास नहीं होता

कभी कभी अचानक दिल में ख़याल आता है कि हम भी काश चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, वीर सावरकर आदि होते परन्तु न तो अब अंग्रेज सरकार है और न मुग़ल बादशाह फिर तो ख्वाइस पूरी हो तो कैसे हो। खास बात ये है कि ऐसे विचार तब आते है जब हम भगत सिंह या सुखदेव आदि जैसे क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ते या सुनते है, तब जी करता है अनायास ही जिए जा रहे है, न तो कोई रस है और न कोई कड़वापन फिर किस बात की जिंदगी क्या मजा है जीने में जब अलग एहसास नहीं है सीने में। परन्तु निराश ना हो ऐ जिन्दगी मुग़ल साम्राज्य ना सही अत्याचार का अन्त भी नहीं फिर करने को तो बहुत है मगर जीवन ही छोटा है शायद कर पाऊ या नहीं यही उलझन भी होती है मगर जितने दिन प्रारम्भ करने में गुजार रहा हूँ उतने तो कम ही हो रहे है, किसी ने क्या खूब कहाँ उम्र छोटी नहीं अगर हम जीना देर से शुरु ना करें तो।

हाथ में झाड़ू सर पे सफ़ेद टोपी भ्रस्टाचार के कंधे से राजनीति में आये लोग।
आतंकी के मरने पर जनाजे में शामिल होकर आतंकी ही करते है वियोग।।

समाज में छिपे भेड़ियों को पहचान लेना सबसे बड़ी सफलता होती है। करने के लिए तो अभी भी बहुत कुछ है सिर्फ बंदूकों या तलवारों से ही युद्ध नहीं होता, सबके किरदार अलग अलग होते है यदि पिक्चर में सभी हीरो ही होंगे तो क्या पिक्चर बन सकती है हर कहानी में विभिन्न अदाएं होती है जहाँ खड़े है वही से अपना किरदार अदा करें! ज़िन्दगी जीने में देर हुई नहीं कि उम्र छोटी हो जायेगी।
ये जिंदगी नहीं है आसान सिर्फ प्रयास ही प्रयास है।
जीत यहाँ किसी को भी नहीं बस एक अभ्यास है।।
चुनौतियां ख़त्म होती नहीं फिर किस बात की जीत।
एक ही चुनौती बार बार आये तो मिलती है सीख।।
हार भी कुछ अजीब है क्योकि हार देती है तारीफ।
तारीफ़ मुर्दो की होती है जिन्दो को ये नहीं है नसीब।।
जीना है तो नीति के अनुसार साम, दाम, दण्ड, भेद क्रमशः अपनाएं! इसलिये सबसे पहले मित्रता पर विचार होना भी चाहिए और कैसी मित्रता? जैसे दूध और पानी की....।पानी ने दूध से मित्रता की और उसमे समा गया..।

जब दूध ने पानी का समर्पण देखा तो उसने कहा- मित्र तुमने अपने स्वरुप का त्याग कर मेरे  स्वरुप को धारण किया है....।
अब मैं भी मित्रता निभाऊंगा और तुम्हे अपने मोल बिकवाऊंगा।
दूध बिकने के बाद जब उसे उबाला जाता है तब पानी कहता है..।
अब मेरी बारी है मै मित्रता निभाऊंगा और तुमसे पहले मै चला जाऊँगा.. । दूध से पहले पानी उड़ता जाता है।
जब दूध मित्र को अलग होते देखता है, तो उफन कर गिरता है और आग को बुझाने लगता है।
जब पानी की बूंदे उस पर छींट कर उसे अपने मित्र से मिलाया जाता है तब वह फिर शांत हो जाता है।
पर इस अगाध प्रेम में..थोड़ी सी खटास- निम्बू की दो चार बूँद, डाल दी जाए तो दूध और पानी अलग हो जाते हैं..।
समझ गए है, थोड़ी सी मन की खटास अटूट प्रेम को भी मिटा सकती है।
"क्या फर्क पड़ता है, हमारे पास कितने लाख, कितने करोड़, कितने घर, कितनी गाड़ियां हैं।"
खाना तो बस दो ही रोटी है, जीना तो बस एक ही ज़िन्दगी है। फर्क इस बात से पड़ता है, कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये, कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए। लेकिन ....। ये क़सीदे
झोली फैलाये बैठा हूँ कहने को कुछ अल्फ़ाज़ नहीं।
माँगू तो मैं क्या माँगू मुझे तेरे सिवा कुछ याद नहीं।।
तभी तक जब तक लोग प्यार की भाषा समझें अन्यथा टिट फ़ॉर टैट, गोली का जबाब तोप से, ईंट का जबाब पत्थर से जो गुलदस्ता देकर दगा करे उसकी कब्र पर उसी गुलदस्ते का फूल चढ़ाए, नेता हो या बेटा क्षमा या बर्दास्त की एक सीमा होती है। सीमा पार करने वाले को समय कभी माफ नहीं करता जिसने माफ़ किया वह सीमा पार हो जाता है। जिंदगी जिए घड़ी की सुइयों की तरह कोई मोटी कोई छोटी किसी की चाल तेज मगर जब दुश्मन के बारह बजाने हो तो सब एक साथ आ जाती है।

Tuesday, 5 July 2016

जिम्मेदार जनता या नेता? यूपी का रुकता विकास

 मायावती लूटी मुलायम लूटे औ लूटे लिए शिवपाल।

बचा खुचा आजम ने लूटा, भैया अबही राम गोपाल।।

यदि किसी की बातों का बुरा लगे तो, सबसे पहले ये देखें कि व्यक्ति महत्त्वपूर्ण है या नहीं, यदि व्यक्ति महत्त्वपूर्ण है तो उस बात को भूल जाएं, फिर देखें कि बात महत्त्वपूर्ण है की नहीं, यदि बात महत्त्वपूर्ण है तो व्यक्ति को भूल जाएं, हो सकता है न व्यक्ति और न बात महत्त्वपूर्ण हो तो व्यक्ति की कुत्तागिरी देखें फिर भी लात मारकर भगाएं नहीं क्योंकि बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय बताती है, इस दुनियाँ में कुछ भी बेकार नहीं। गंदे नाले का पानी अगर पी नहीं सकते तो कम से कम आग बुझाने के काम तो आ सकता है। मगर सभी वस्तुओं को अपनाया भी नहीं जा सकता। यही अपनाने की प्रक्रिया ही हमें बनाती है, सफल-असफल, आमिर-गरीब, राजा-प्रजा, मुर्ख-विद्वान आदि। जो लोग अत्यधिक भावुक होते है वे सबसे पहले रिस्ते, दोस्त अतिशीघ्र बनाते है, और उनके अंदर बातों का प्रभाव भी अधिक आसानी से होता है। इसिलए भाषण मात्र से उन्हें दुनियां बेवकूफ़ बना जाती है। ऐसे लोग बड़े खयाली होते है, सामने वाले ने कोई वादा भी नहीं किया मगर अपने मन में तरह तरह के ख़याल बैठा लेते है। जैसे मायावती ने नारा लगाया "तिलक तराजू औ तलवार, इनको मारो जूते चार।" तो दलितों में ख़याल लगाया कि हमरा नेता जीतेगा तो सभी सवर्णो को खदेड़ कर सारी ज़मीन हमें दे देगा। मगर हुआ कुछ उल्टा ही। मायावती ने पैसे लेकर पार्टी के टिकट बेचे उन्ही सवर्णो को, जिसकी संपत्ति छिनने का ख़्वाब लिए बैठा था लालची मानव, और खुद कमाये अरबों खरबों। "अपने तो हो गई दौलत की बेटी, दलित ढूढ़ रहा है दो वक्त की रोटी।" बड़े बड़े पार्क हाथी घोड़ो के ताबूत बनवाये, साथ ही खुद जिन्दा मगर अपनी मूर्तियां लगवाये। ताज़महल के पत्थर बेचे, NRHM में ग़रीबो की दवाइयां बिक गई। एक, एक सांसद, विधायक अरबों खरबों रुपये कमाए, मगर दलित के हाथ पहले भी झंडू थे और अब भी झंडू ही नजर आये।

थक हार कर दलितों का कुछ उमंग बगैर मेहनत संपत्ति पाने वाला ख़याल, कुछ कम हुआ ही नहीं था, कि कथित पिछड़ा वर्ग जो कभी राज घराने से आता है, कहने के लिए भगवान कृष्ण का वंशज कहलाता है, मगर हराम की संपत्ति लेने का ऐसा चस्का चढ़ा कि, यूपी का कमान विरादरी के नाम पर पकड़ा दिया मायाबी मुलायम को। जिसके एक, एक भाई, भतीजे नात रिस्तेदार यार दोस्त सबने लूटा यूपी को , जिनके घर में कभी मेहनत से दो वक्त के चूल्हे जला करते थे, आज वे शराब शबाब कबाब के शौक़ीन हो गए। कहते है, जो चीज आसानी से मिलती है, वह आसानी से जाती भी है। कुछ अन्य जातियों को भी खूब लाभ मिला, क्योंकि ये दुनियां व्यापर है। राजा कोई भी हो चाहे आप खुद ही हो, मगर चालक न तो कभी खाये बगैर रहा है और न रहेगा। राजा का धर्म भी यही होता है कि, चालक को रोके और भावनाओं में बिकने वाले ईमानदार साधारण व्यक्ति को भी अवसर प्रदान करें!ताकि कोई भी भूखा नहीं रह जाय, वर्ना राजा का क्या काम? यदि चालक लूटता रहे और ईमानदार भूखा मरे? मगर जिस राज का राजा ही चालाक हो, वहाँ चालाकियां तो होगी ही। और जाति के नाम पर आस लगाए बैठे लोग हो गए विधवा।

एक बात है इस दुनियां में विधवा भी अनेकों प्रकार की होती है। जैसे आस रांड, पास रांड, रांड, रन्डक्का आदि इनका अर्थ भी है जो आस लगाकर बैठे की पिया विदेश है कभी आएंगे, दूसरा कि पिया पास में मगर रांड की तास अधूरी है, तीसरा जिसका पति मर गया हो, चौथा पति होने के बाद भी पूरा मोहल्ला रांड की तारीफ़ में लगा पड़ा हो आदि आदि। इन दोनों पार्टियों ने उत्तर प्रदेश की जनता का हाल कुछ इस कदर ही किया। क्योंकि राज्य में हिंदुओं और मुसलमानों में भेदभाव किया जाने लगा, मात्र वोट बैंक के आधार पर, हिन्दू मरा तो कोई गम नहीं, मगर मुस्लिम मरा तो पचास लाख़ और बँगला, मुस्लिम जलूसों के लिए हिन्दुओ की मूर्तियां ढकी जाने लगी, मुस्लिम त्योहारों पर मुलायम का पूरा खानदान टोपी में नज़र आने लगा, मुस्लिम लड़के लड़कियों को दसवी पास करने पर तीस तीस हजार देने का प्रचार किया जाने लगा, यदि किसी ने हिन्दुओ को देने की बात कही तो बड़े गर्व के साथ मना भी किया गया, और मना करते भी क्यों नहीं नफ़रत बढ़ाने की राजनीति जो करनी है। यदि हिन्दुओ को भी दिया जाता तो क्या किसी मुसलमान का घाटा हो जाता ? मगर ऐसा इसलिए किया गया  जिससे हिन्दुओ में ग्लानि हो और मुस्लिम वोट दें। मगर हकीकत यही नहीं है कि हर मुस्लिम के साथ ऐसा ही हो रहा। कितने तो मर गए अँधेरे में जिनके सामने कैमरा नहीं लग पाया, जिनके सामने कैमरा लगा वही पाये। सिर्फ कैमरा लगने के बाद ही भेदभाव हिन्दू मुस्लिम दलित अमीर गरीब में होता है, वर्ना रात के अँधेरे में सारे के सारे चालक एक साथ और गरीब बेवकूफ़ लोग एक साथ। फिर भी बेवकूफों के ही वोट से ये सारे ठग लुटेरे चुनाव जीत कर आते है।

एक बात आम गरीब जनता को भलीभांति समझ लेना चाहिए कि अमीर वर्ग जो निहायत ही चालक वर्ग है। यही है नेता, यही है व्यापारी, यही है आपके सगे सम्बन्धी तो आप गरीब तो होंगे ही। यदि अपनी स्थिति सुधारनी है तो सबसे पहले सगे सम्बन्धी होने का ख़याल छोड़े !! सत्ता और धन का लालच ही कुछ ऐसा होता है कि, भाई भाई को नहीं पहचानता, बेटा बाप को भूल जाता है,  आप कौन सी बुद्धिमानी कर रहे है रिस्ता जोड़कर? क्या आप ऐसा नेता नहीं चुन सकते जो संत हो! जिसे माया मोह से मतलब नहीं हो! जिसने सेवा के लिए अपना घर द्वार छोड़ समाज की सेवा करनी ठान ली हो! आप सहयोग करेंगे तो ऐसे लोगों से सुधार शीघ्र संभव होगा वर्ना ये लोग तो सेवा करना छोड़ने वाले नहीं है! मगर इनकी गति धीमी होगी जिसका लाभ आप तक पहुँचने में समय लग सकता है । हो सकता है तब तक देर भी हो जाय।

बाबर की नाजायज हर औलादों से अब कह देना!
बँद करे जयचंद यहाँ पर औ गद्दारो को सह देना !!

Saturday, 2 July 2016

मुस्लिमों की उत्पत्ति से ही, स्वर्ग लोक से अधिक रमणीय और सुन्दर पृथ्वी पर कलयुग का राज स्थापित हुआ

विष्णु भगवान के अवतार:-
1- श्री सनकादि मुनि
2- वराह अवतार
3- नारद अवतार
4- नर-नारायण
5- कपिल मुनि
6- दत्तात्रेय अवतार
7-  यज्ञ
8- भगवान ऋषभदेव
9- आदिराज पृथु
10- मत्स्य अवतार
11- कूर्म अवतार
12- भगवान धन्वन्तरि
13- मोहिनी अवतार
14- भगवान नृसिंह
15- वामन अवतार
16- हयग्रीव अवतार
17- श्रीहरि अवतार
18- परशुराम अवतार
19- महर्षि वेदव्यास
20- हंस अवतार
21- श्रीराम अवतार
22- श्रीकृष्ण अवतार

महाभारत युद्ध के पश्चात घरती पर शुरू हुआ कलयुग, कलयुग के कुछ अपने विचार सिद्धांत अन्य युगों से अलग होने की वजह से धरती पर पल बढ़ रहे जीवों को बदलना इतना आसान नहीं था, श्री विष्णु भगवान के बाइस अवतारों ने सनातन धर्म को इतना मदत किया कि मृत्युलोक स्वर्गलोक से अधिक प्रिय होने लगा यहाँ के दैत्य भी यज्ञ पूजा पाठ करने लगे, जिसकी वजह से देवताओं में भय व्याप्त होने लगा कि मृत्युलोक जब सुन्दर हो जायेगा तो प्रकृति के नियम बदलने होंगे जो कि असंभव है, परन्तु ऐसा सम्भव हुआ तो सारी मर्यादाओं का उलंघन होगा फिर तो विष्णु भगवान ने पुनः तेइसहवां अवतार लिया भगवान गौतम बुद्ध के रूप में।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व क्षत्रिय कुल के शाक्य नरेश शुद्धोधन के घर सिद्धार्थ के रूप में हुआ, विवाहोपरांत नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर, संसार को मरण से उत्पन्न दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश में रात में राजपाठ छोड़कर जंगल चले गए। वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ से बुद्ध बन गए।
लगभग 80 वर्षों के बाद 483 ईस्वी पूर्व में उन्होंने मृत्युलोक का परित्याग किया। विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भी बुद्ध भगवान ही थे।

बुद्ध भगवान ने दैत्यों को यज्ञ हवन न करने की सलाह दे देवताओं की मदत की, तथा धरती को प्रकृति के नियमो के अनुसार चलने में कलयुग की मदत की, परन्तु मात्र इतने से कलयुग को संतुष्टि नहीं हुई तब लगभग 470 वर्षो के इंतजार के बाद कलयुग ने यीशु मसीह को चुना अपने संदेशवाहक के रूप में जिन्होंने यहुदिओं को ज्ञान दे ईसाई रूप में परिवर्तित किया। ईसाई धर्म से भी कलयुग को असंतुष्टि ही हुई, फिर लगभग 570 वर्षो के पश्चात पुनः कलयुग ने मुहम्मद पैग़म्बर को अपना दूत बनाया।
मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का जन्म अरब के रेगिस्तान में मुस्लिम इतिहासकारों के अनुसार 20 अप्रैल 570 ई. में हुआ। जिन्होंने निम्न जीवन साथियो
पत्नी: 1- खदीजा बिन्त खुवायलद
2- सोदा बिन्त ज़मआ
3- आयशा बिन्त अबी बक्र
4- हफ्सा बिन्त उमार
5- ज़य्नाब बिन्त खुज़आयमा
6- हिन्द बिन्त अवि उमय्या
7- ज़ाय्नाब बिन्त जहाश
8- जुवय्रिआ बिन्त अल-हरिथ
9- राम्लाह बिन्त अवि सुफ्याँ
10- रय्हना बिन्त ज़यड
11- सफिय्या बिन्त हुयाय्य
12- मयुमा बिन्त अल-हरिथ
13- मरिया अल-क़ीब्टिय्या
के साथ इंसानो को एक अलग ही जीवन शैली बताई जो आज के कुछ इंसानो को खूब रास आई। जब इतने प्रकार की कलाओं से कोई इंसान गुजारेगा तो स्वाभाविक है मृत्युगति को प्राप्त होना। अतः 8 जून 632 में पैगंबर साहेब कि मृत्यु हुई। समय को ज्ञात है कि यदि किसी से कुछ करवाना है तो सबसे पहले उसे अपने अनुरूप करो और समय ने ऐसा ही किया। फिर देखादेखी अन्य लोगो में भी यही प्रवित्ति जागने लगी और पुरुषों को तन प्रिय और औरतों को धन प्रिय होने लगा। तन धन की चपेट में आकर मनुष्य एक मांस के टुकड़े रूप में नजर आने लगा फिर तो क्या पशु और क्या मानव बदल गया और हो गया मांस प्रेमी दानव।

अल्ला शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द अल्ला से हुई है, "अल्लोपनिषद". चण्डी,भवानी,दुर्गा,अम्बा,पार्वती आदि देवी को आल्ला से सम्बोधित किया जाता है। जिस प्रकार सनातनी लोग मंत्रों में "या" शब्द का प्रयोग करते हैं देवियों को पुकारने में जैसे "या देवी सर्वभूतेषु....", "या वीणा वर ...." वैसे ही मुसलमान भी पुकारते हैं "या अल्लाह"..इससे सिद्ध होता है कि ये अल्लाह शब्द भी ज्यों का त्यों वही रह गया बस अर्थ बदल दिया गया।

सनातन धर्म के अनुयायी भी समय के प्रभाव से निष्क्रिय होने लगे, पहले से ही शक्ति, धन, ज्ञान की चाह ने दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की उपासना के लिए प्रेरित होते मनुष्यों से जटा से शीतल गंगा को प्रवाहित करनेवाले शंकर भगवान को समुद्र मंथन के समय विष पिला दिया तो भगवान शंकर के भक्त गर्म दिमाग और विष पान से भगवा पुरुष तांडव करे तो क्या गलत? मगर जो कुछ भी हो कलयुग ने धरती को अपने अनुसार बना ही लिया। वर्तमान स्थिति और अत्याचार संविधान से कोई भी अछूता नहीं, अबतो न्याय भी धर्म जाति व्यक्ति का मोहताज है। ये कलयुग का असर ही तो है। अब इंतजार कीजिए कि विष्णु भगवान अपने चौबीसहवें अवतार कल्कि भगवान के रूप में प्रगट हो और कलयुग का कार्यकाल समाप्त करें!!