Tuesday, 28 April 2020
ऊंचे विचार और अच्छे संस्कार से लक्ष्य मिलेगा
Friday, 9 March 2018
इतिहास उधर मुड़ जाता है। जिस ओर से भगवा चलता है।।
इतिहास गवाह है मिठाई में कीड़े लग जाते लेकिन "नमक" में नही इसीलिए मीठी मीठी बातें कर मैं आपको बेवकूफ नही बनाना चाहता। हमारे देश में बड़े बड़े वकील, महात्मा गांधी, बाबा भीमराव अंबेडकर थे, मगर किसी ने भगतसिंह का मुकदमा नही लड़ा, चाहते तो भगतसिंह को फांसी नही होती लेकिन कही भगतसिंह इनसे अधिक लोकप्रिय ना हो जाए। इस बात की जलन था। फिर ये कैसा राष्ट्रपेम ? इन्होने कैसे आजादी दिलवाई? भगतसिंह हँसते गाते फांसी पर झूल गए, क्योंकि इनके अंदर दलाली करने का कोई गुण नही था। भारत माता के लिए फांसी पर चढ़ने वाले को आतंकी बताया जाने लगा। रावण की छीक से सीता जी का जन्म हुआ... रावण सीता का बाप था ऐसा बच्चों को पढ़ाया जाने लगा। इसलिए
हम सभी लोगों के लिए चिंतन हो गया
इनके हो गए बाबर औरंगजेब टीपू मगर शिवाजी महाराज महाराणा प्रताप दुश्मन हो गया
गद्दार सिंधिया को पूजने वालों को ना जाने रानी लक्ष्मी बाई की वीरता से क्यों जलन हो गया
भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद आदि को आतंकी बताने वालों को लालच में आकर वहम हो गया
क्योंकि जाति जाति में बंट गए हैं भारतीय बेवकूफ इन मूर्खो के अंदर से मानवता का दहन हो गया
इन्ही की नादानियों से ठगों ने राज किया, सुभाष चंद्र बोस के प्रयासों का निधन हो गया
इन्ही की वजह से बंगाल में कभी दुर्गा पूजा मुख्य पर्व हुआ करता था लेकिन अब मुहर्रम हो गया
हारा हारा गोरी सत्रह बार हारा पृथ्वीराज ने एक बार भी नहीं मारा इसीलिए चौहान का वतन खो गया
मूर्खता और गद्दारी का हिंदुस्तान से पुराना रिश्ता है, अपने ही भाई को पिटता देख चुप रहना हमारी आदत, अंग्रेजो का दात खट्टा करने वाली रानी लक्ष्मी बाई की हार भी तब हुई थी जब सिंधिया ने अंग्रेजों से मिलकर अपने को मजबूत करने के लिए गद्दारी की।
विचारे चंद्रशेखर आजाद गए थे बनावटी पंडित जी से भारत आजाद कराने के लिए मदत माँगने मगर मिला क्या? गद्दारी! .. जालियां वाले बांग में अंग्रेजो से खुदको घिरा देख अपने ही सर में गोली मार लिया मगर आजादी को नही झुकने दिया।
जब तक गद्दार रहेंगे भारत में, कैसे सम्मान करू उनका,
राम मंदिर ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर कपिल सिब्बल विरोध कर जाते हैं
सभी देशद्रोहियों का मुकदमा लड़ने वाले रामजेठमलानी जिनका गुण गाते हैं
ये गद्दारी करते है हम लोगों से और विदेशों से लाखों अरबों रुपये कमाते हैं
कैसे सम्मान करू उस देशद्रोही पार्टी का जिस पार्टी से ऐसे वकील भी आते हैं
जिस दिन मूर्खो जाति पात से ऊपर उठकर इन देशद्रोहियों को पहचानोगे
उस दिन भारत माँ को गर्व होगा तुझ जैसा बेटा पाकर, खाई गरीबी अमीरी की मिट जाएगी
त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति गिराने जेसीबी आई थी इनके लिए कुत्ता पकड़ने वाली गाड़ी आएगी
सबको मिले निर्भीक न्याय अतः गद्दारो को भगाना होगा
सबको मिले आदर्श व्यवस्था, समान संविधान लाना होगा
उठो धरा के वीर सपूतों भारत माँ का सम्मान करो।
समझो इनकी चालबाजियां फिर से ना नादान बनो।।
तलवारों की छाओ में, भगवा रंग लहरता है।
इतिहास उधर मुड़ जाता है जिस ओर से भगवा चलता है।।
Saturday, 3 March 2018
आजादी का देके नारा लूटे भारत लूटे गरीब का घर सारा।
गांधी जी ने आजादी दिलवाई
चंद्रशेखर आजाद ने गोली खाई
सरदार भगत सिंह फांसी पर झूले
बिस्मिल खान को सब कोई भूले
वीर सावरकर गए जेल में
बाबा साहेब बने मसीहा खेल खेल में
चाह रहे थे सब बल्लभाई
मगर गांधी जी ने आंख दिखाई
पाकिस्तान जब जिन्ना हथियाई
तब पंडित नेहरु जी कुर्सी पाई।
जातिवाद की बढ़ रही थी खाई
राष्ट्रवाद तब ले रहा था जम्हाई
गरीबी हटाओ का नारा नेहरू से आया
इंदिरा जी ने इसको खूब चमकाया
राजीव गांधी ने भी जुमला दुहराया
इन्ही कुकर्मो का फल राहुल पाया
हिन्दू कटता रहा सेक्युलरिज्म के नाम से
कश्मीर में आतंक भटका रहा कांग्रेस के काम से
मगर जब से हिन्दू जागा
भूत प्रेत सेक्युलरिज्म का भागा
फिरत बावला राहुल गांधी
भगवा वस्त्रन की आ गई आंधी।।
चोर लुटेरे सब परेशान
पाकिस्तान भी अब हैरान
फिर मोदी आया तब क्या होगा
बेच भीख कटोरा मिलेगा ठोंगा
सोच में पड़े सब पाकिस्तानी
दुनिया भई मोदी की दीवानी
हिंदुस्तान के सारे चमचे परेशान
बार बार रोकते है संसद में काम
कश्मीर पर कर बैठे हैं मनसौदा
कुर्सी संग पाकिस्तान से सौदा
पाकिस्तान नेहरू की खातिर
कश्मीर होगा राहुल पर हाज़िर
जैसे इन्होंने केजरीवाल को तोड़ा
वैसे ही तीन बंदर गुजरात में जोड़ा
ऐसा ही ये करते रहेंगे कारनामा
कर्जा दे नीरव माल्या को भगाना
फिर आरोप नरेंद्र मोदी पर लगाना
हमें समझना होगा इनका बहाना।।
मंजिल तक जाना आसान है
टिके रहना वीरो का काम है
राजनीति की अस चतुराई
सकल संगठन जात समाई
माया महा ठगनी हम जानी ...
दलितों का नेता बनकर आएंगे
भीम भीम का नारा लगवाएंगे
मक्कारों का मकसद धन की कमाई
बिके देश या इनकी मां बहन लुगाई
देगे भ्रष्टाचार मिटाओ का नारा
समझो इनका कांग्रेस से रिस्ता सारा
बोलेगे आरक्षण को खतरा है
समझ लो आपने हरामी पकड़ा है
जो आपके हिंदुस्तान को बेच देगा
आपकी गलती की सजा आपके बच्चों को मिलेगा।।
Sunday, 9 April 2017
हिन्दू वेदों के अनुसार :- एकं सत विप्राः बहुधा वदन्ति
हिन्दू समाज में जब जब भी धर्म आधारित मुद्दों पर चर्चा होती है , सामान्यतः लोग दो श्रेणियों में बंट जाते हैं एक अज्ञानी मानवतावादी दूसरा कट्टर हिन्दू !! मैंने पहली श्रेणी के बंधू के लिए “अज्ञानी” इसलिए लगाया क्योंकि हिन्दू होना और मानवतावादी होना अपने आप में पर्यायवाची हैं नाकि विरोधाभासी , पर चूंकि बचपन से ही हमारी वामपंथी शिक्षा व्यवस्था से ये सिखाया जाता है की पहले इंसान बनो धार्मिक नहीं ,इसलिए ऐसे लोगों के मन में धर्म के प्रति एक भय मिश्रित छवि निर्मित हो चुकी होती है , धार्मिक होना कोई गुनाह सा लगने लगता है , वो भी बिना अपने धर्म को पढ़े और समझे !!
मैंने दूसरी श्रेणी के व्यक्ति के साथ कट्टर इसलिए लगाया क्योंकि धर्म पर श्रद्धा रखने वालों को दुनिया ऐसा ही मानना चाहती है और दुनिया ऐसा मानना चाहती है तो हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं ,क्योंकि इतिहास गवाह है की ज्यादातर धर्मों में जब जब श्रद्धा अंध श्रद्धा में बदली , तब तब रक्तपात हुआ है और आज भी हो रहा है , इसलिए हमारे हजारों सालों के इतिहास और शासन के बूते हम ये जरूर सिद्ध कर सकते हैं की एक कट्टर हिन्दू ही मानवता की सच्ची परिभाषा में खरा उतर सकता है !!
“गर्व से कहो हम हिन्दू हैं” की इस पूरी चर्चा को मैंने एक काल्पनिक वार्तालाप में परिवर्तित करने की कोशिश की है :-
अज्ञानी :- गर्व से कहो हम हिन्दू हैं इसका क्या मतलब है ?
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कट्टर :- धर्म एक प्राचीन व्यवस्था है ,हर व्यक्ति या उसके पूर्वज किसी न किसी धर्म से कभी ना कभी जुड़े थे ,आप हिन्दू हैं इसे आप चाहकर भी अपने से अलग नहीं कर सकते , आपके माता पिता हिन्दू थे,आपके पूर्वज भी हिन्दू थे,फिर उस पहचान पर गर्व करने में क्या बुराई है ?
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अज्ञानी :- नहीं मैं सिर्फ एक इन्सान हूँ , किसी धर्म में नहीं बंधना चाहता मैं
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कट्टर :- जब तुम पैदा हुए थे तब तो नंगे ही आये थे , फिर आज कपडे क्यों पहन रखे हैं , जैसा ईश्वर ने भेजा था वैसे ही रहो !! कहने का आशय ये है की धर्म मनुष्य को सभ्य बनाता है, यहीं से सभ्यता और संस्कार की बात शुरू होती है !!
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अज्ञानी :- ठीक है , पर मैं हिन्दू हूँ तो इसमें गर्व करने की क्या बात है , ऐसा करना क्या मुझे समाज के दूसरे वर्ग से अलग नहीं खड़ा कर देता ?
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कट्टर :- क्या अपने हिन्दू होने पर गर्व करने से तुम किसी और को गाली दे रहे हो या किसी और को नीचा दिखा रहे हो ?
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अज्ञानी : नहीं पर ऐसा कहना परोक्ष रूप से तो उकसाने वाला ही हुआ ?
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कट्टर :- तुम अपने पिता को दुनिया का सबसे अच्छा पिता मानते हो क्या इसका ये मतलब है की तुम बाकियों के पिता को गाली दे रहे हो ? नहीं ना , बिलकुल वैसे ही ! जहाँ तक बात है उकसाने वाली तो दिक्कत ये है की सदियों से हिन्दू समाज को बिखरा हुआ देखने की आदत सी हो गयी है,इसलिए धार्मिक उन्माद फ़ैलाने वाले तत्वों को इससे तकलीफ होती है की हिन्दू कभी इकठ्ठा होने की सोचे भी , जाती आधारित या सम्रदाय आधारित वोट बेंक की राजनीती करने वालों का गणित बिगड़ जाता है अगर हिन्दू समस्त जातिभेद भुला कर एकजुट हो जाये !!
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अज्ञानी :- मेरे हिसाब से तो धर्म नाम की चीज़ ही इन्सान को इन्सान से अलग करने के लिए बनी है , इसलिए किस बात का गर्व करें ?
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कट्टर :- तुम अपने धर्म के बारे में क्या क्या जानते हो ? क्या क्या साहित्य , ग्रन्थ , पुराण पढ़ा है तुमने ? किन किन महापुरुषों को मानते हो और उनकी कौन कौन सी पुस्तकें पढ़ी हैं ? कोई विदेशी तुम से तुम्हारे धर्म संस्कृति के बारे में पूछे तो कुछ बोल भी पाओगे ?
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अज्ञानी :- कुछ खास नहीं पढ़ा और सांप्रदायिक साहित्य पढने में रूचि नहीं है मेरी
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कट्टर :- मेरे अज्ञानी बंधू , सुनो , धर्म की परिभाषा हिन्दू मान्यता के अनुसार :-
यतोभ्युदय निह्श्रेयस सिद्धिः स धर्मः
अर्थात धर्म एक प्रकार की व्यवस्था है जो मनुष्य को अपनी इच्छाओं को संयमित करने को प्रोत्साहित करती है , एक आदर्श जीवन जीने का मार्ग देती है और समस्त भौतिक जीवन जीते हुए भी दैवीय तत्व अथवा शाश्वत सत्य की अनुभूति के लिए क्षमता प्रदान करती है !!
धारणात धर्ममित्याहु धर्मो धारयति प्रजाः
अर्थात वह शक्ति जो व्यक्तियों को एकत्रित लाती है और समाज के रूप में धारण करती है – धर्म है
कुछ समझे ?
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अज्ञानी :- हाँ पर हम धर्मनिरपेक्ष लोग हैं, इस समाज में कई धर्मों के लोग हैं , क्या उनको अकेला छोड़ दें ?
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कट्टर :- पहले तो अपना ये मिथक तोड़ दो की प्रजा धर्मनिरपेक्ष होती है , कभी नहीं होती , शासक धर्मनिरपेक्ष हो सकता है , सरकार हो सकती है पर प्रजा कभी नहीं !! तुम्हारा धर्म कहता है सच बोलो , अच्छा आचरण करो , नारी का सम्मान करो, फिर धर्म निरपेक्ष होकर कैसा जीवन जीना चाहते हो ?
तुम्हारी दूसरी बात का जवाब , हिन्दू वेदों के अनुसार :-
एकं सत विप्राः बहुधा वदन्ति
Thursday, 22 December 2016
शंकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावही सीसा।।
हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥
भगवान शिव कैलाश में दिन-रात राम-राम कहा करते थे। सती के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हो उठी। उन्होंने अवसर पाकर भगवान शिव से प्रश्न किया,
ऐसेही संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।
सतिहि ससोच जानी वृषकेतु। कही कथा सुंदर सुख हेतु।।
'आप राम-राम क्यों कहते हैं? राम कौन हैं?' भगवान शिव ने उत्तर दिया, 'राम आदि पुरुष हैं, स्वयंभू हैं, मेरे आराध्य हैं। सगुण भी हैं, निर्गुण भी हैं।' किंतु सती के कंठ के नीचे बात उतरी नहीं। वे सोचने लगीं, अयोध्या के नृपति दशरथ के पुत्र राम आदि पुरुष के अवतार कैसे हो सकते हैं? वे तो आजकल अपनी पत्नी सीता के वियोग में दंडक वन में उन्मत्तों की भांति विचरण कर रहे हैं। वृक्ष और लताओं से उनका पता पूछते फिर रहे हैं।
हे खग हे मृग मधुकर श्रेनी। तुम देखी सीता मृग नैनी।।
यदि वे आदि पुरुष के अवतार होते, तो क्या इस प्रकार आचरण करते?
सती ने अपने पति शिव जी पर विश्वास नहीं किया और मन में राम की परीक्षा लेने का विचार उत्पन्न हुआ। सीता का रूप धारण करके दंडक वन में जा पहुंची और राम के सामने प्रकट हुईं।
भयऊ ईश मन छोभ बिसेखी। नयन उघारी सकल दिसि देखि।।
शंकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावही सीसा।।
भगवान राम ने सती को सीता के रूप में देखकर कहा, 'माता, आप एकाकी यहाँ वन में कहां घूम रही हैं? बाबा विश्वनाथ कहां हैं?' राम का प्रश्न सुनकर सती से कुछ उत्तर देते न बना। वे अदृश्य हो गई और मन ही मन पश्चाताप करने लगीं कि उन्होंने व्यर्थ ही राम पर संदेह किया। राम सचमुच आदि पुरुष के अवतार हैं। सती जब लौटकर कैलाश गईं, तो भगवान शिव ने उन्हें आते देख पूछा क्या हुआ तो सती ने सीधा सीधा बताया कि कुछ नहीं आपने जो कहा कि श्री राम भगवान है वह सत्य है, मगर शिव जी अंतर्यामी सब कुछ उन्होंने देखा और कहा 'सती, तुमने सीता के रूप में राम की परीक्षा लेकर अच्छा नहीं किया। सीता मेरी आराध्या हैं। अब तुम मेरी अर्धांगिनी कैसे रह सकती हो! इस जन्म में हम और तुम पति और पत्नी के रूप में नहीं मिल सकते।'
सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौर सँवारा।।
मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।
बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।
शिव संकल्प कीन्ह मनमाहि। यह तन सती भेट अब नाहि।।
शिव जी का कथन सुनकर सती अत्यधिक दुखी हुईं, पर अब क्या हो सकता था। शिव जी के मुख से निकली हुई बात असत्य कैसे हो सकती थी?
सिय बेषु सतीं जो कीन्ह तेहिं अपराध संकर परिहरीं।
हर बिरहँ जाइ बहोरि पितु कें जग्य जोगानल जरीं।।
चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।
बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु।।
रावण ने भी नारियों के बारे में कहा है कि
नारि स्वभाउ सत्य सब कहहि। अवगुन आठ सदा उर रहहि।।
यह कथा सुनाने का मतलब विश्वास करना भी सीखें।
Sunday, 2 October 2016
पाकिस्तान का पैर कब्रिस्तान में।
तीन रूप पाकिस्तान दिखाए,
चीन पहुँच हिजड़ा बनी जाये,
कुत्ते की शक्ल कुत्ता कहलाये,
यू एन में जाकर पूँछ हिलाये,
गीदड़ भभकी हमें दिखाये,
हुआ हुआ कर हिन्द डराये,
गधा बुद्धि वह समझ न पाए,
जब भभके तब जूता खाये,
अबकी कुत्ता पागल हो गवा है,
लगी है झापड़ होश हवा है।
हाफ़िज बोला सर्जिकल सिखाएंगे,
पैजामा हुआ है गीला उसे सुखायेगे,
फिर कसके नाड़ा भी लगाएंगे,
मेरे सैनिकों तुम बुरा मत समझो,
तुम्हारी कब्र से जंनत की राह बनाएंगे,
अन्दर ही अन्दर एक सुरंग बनाएंगे,
चाँद की जगह झण्डे में कटोरा लगाएंगे,
हुरे नहीं मिली तो थुरे दिलाएंगे,
अभी हिंदुस्तानियों ने खोदा कुआँ है,
लगी है झापड़ होश हवा है।
सारे विदेशी फ़ोन कर रहे है,
नापाक सलामती दुआ कर रहे है,
चीन भी दुःखी है इन्वेस्टमेंट से,
पाकिस्तान के पिटते कॉमेंट से,
सभी कह रहे है कम्बख्त सुधार,
अन्यथा मेरा लौटा दे अभी उधार,
कर्जदारों की बातें ना कोई नवा है,
लगी है झापड़ होश हवा है।
Thursday, 29 September 2016
पाकिस्तान
हम भारतीय शेर का शिकार करनेवाले कभी कुत्तों को नहीं संघारे है।
दुश्मन जो सीना तानकर खड़ा हो मैदान में हम सदा उसी को मारे है।।
महिलाओं पर अत्याचार करनेवाले मर्दो की संगत क्या निभाएंगे।
जो कभी मुर्दा भी जला नहीं सकते वे हमें जिन्दा क्या जलाएंगे।।
हिन्दुस्तान की दया पर जिन्दा रहनेवालों तुम्हारे पास ना पानी है।
जितनी बार युद्ध किये हारे हो हर बार उसी की याद दिलानी है।।
कमर के नीचे तुम्हें जब भी देखा है तेरी तो पोशाक जनानी है।
पुरुषों के गुण नहीं तुझमें बिना मूछ के नारी यही तेरी कहानी है।।
हमने तुम्हे जितनी बार समझाया तू हर बार थोड़ा बहुत शर्माया।
निर्लज्ज हो तुम इतना कि मेरी दी हुई इज्जत तुझे रास ना आया।।
जैसे तुझे पाला पड़ोस में वैसे ही अपने देश में कुछ कुत्ते पाले है।
बखूबी हमें पहचान है उनकी जिन्हें तुमने कुछ हड्डियां डाले है।।
जब तक भूकता कुत्ता तब तक परवाह हम हिन्दुस्तानी नहीं करते।
मगर जब भूकते हुए नज़दीक आ जाये तभी हम वार है करते।।
कुत्ते भय से खुद भागके मरते जब क्रोधित होता हिन्दुस्तानी है।
कुत्ते हम कभी मारा नहीं करते ये हर हिंदुस्तानी की कहानी है।।
वे क्या लडेंगे हमसे जिन्होंने सीखा मुर्गे से सुबह उठ बाग़ लगाना।
हम मूछ का सम्मान करते है नहीं सीखा बकरों सा दाढ़ी बढ़ाना।।
तुम्हारी लड़ाई सूअर से जो तुमसे अधिक बच्चे पैदा कर लेती है।
हमें हर हाल में प्रेरणा हमारी भारत माँ या गऊ माता ही देती है।।
Thursday, 22 September 2016
प्रकृत से मिली हुई ब्रह्माण्ड की संपूर्ण शक्ति को महसूस करें.!
जो अमूल्य वस्तु आपको प्रकृत से मिली है उसका आपको एहसास नहीं, इसीलिये आप सदैव दूसरों से कुछ न कुछ प्राप्त करना चाहते है, क्योंकि आप इस धरती के है ही नहीं और धरती पर रहना चाहते है तो आपको रहने की इस चाहत की वजह से, प्रकृत द्वारा प्रदान की हुई अमूल्य वस्तु में से कुछ न कुछ गवाना पड़ता है। सीधी सी बात है इस दुनियां में मुफ्त कुछ भी नहीं मिलता, बीबी बच्चे भाई बंधू दोस्त हो या राशन कपड़ा मोटर गाड़ी टी वी मोबाइल या जल फल स्वास के लिए वायु आदि। कहते है कि क्या आप 100 रुपये का नोट खरीद सकते हो तो चकित ना होए आप खरीद सकते हो बस सौ रुपये की जगह 101 या 200 रुपये कुछ भी देना पड़ सकता है। मगर आपकी चाहत पूरी अवश्य होगी। यही चाहत ही आपके पतन का कारण है। यह बात समझना या समझना इतना आसान नहीं जितना मैं सोच रहा हूँ, मगर प्रयास तो करना ही चाहिए।
चाहत ही है जो हमें अपने होने वाले पतन को देखने नहीं देती जैसे जब हम पानी पीते है तो सोचते है कोई कीमत अदा नहीं की गई मगर जो कीमत आपने अदा की वह दिखी नहीं, क्योंकि पानी के साथ प्रकृत के बनाएं हुए कितने किटाडु आपके अंदर जीवन यापन करने के लिए प्रवेश किये, जीतनी देर पानी पिया उतनी उम्र कम हुई आदि वह नहीं दिखा। उसी तरह वायु हो या फल सबके सब कुछ न कुछ कीमत लेते है तो फिर इंसान या जानवर से कुछ लेंगे तो वह कीमत क्यों नहीं लेगा..? लेगा मगर आपको एहसास होने नहीं देगा और यही एहसास नहीं होने से आपका पतन एश्वर्य से होता है अन्यथा आप खुद ही भगवान है। समझ में नहीं आया तो यह कहानी पढ़े, शायद आपने पढ़ी भी हो।
एक आदमी ने भगवान बुद्ध से पुछा : जीवन का मूल्य क्या है?
बुद्ध ने उसे एक Stone दिया और कहा : जा और इस stone का
मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान रखना stone को बेचना नही है I
वह आदमी stone को बाजार मे एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है?
संतरे वाला चमकीले stone को देखकर बोला, "12 संतरे लेजा और इसे मुझे दे जा"
आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले stone को देखा और कहा
"एक बोरी आलू ले जा और इस stone को मेरे पास छोड़ जा"
आगे एक सोना बेचने वाले के
पास गया उसे stone दिखाया सुनार उस चमकीले stone को देखकर बोला, "50 लाख मे बेच दे" l
उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..
उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू ने इसे बेचने से मना किया है l
आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे stone दिखाया l
जौहरी ने जब उस बेसकीमती रुबी को देखा , तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस बेसकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका l
फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेसकीमती रुबी? सारी कायनात , सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नही लगाई जा सकती ये तो बेसकीमती है l"
वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे बुद्ध के पास आया l
अपनी आप बिती बताई और बोला "अब बताओ भगवान , मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?
बुद्ध बोले : संतरे वाले को दिखाया उसने इसकी कीमत "12 संतरे" की बताई l
सब्जी वाले के पास गया उसने इसकी कीमत "1 बोरी आलू" बताई l
आगे सुनार ने "2 करोड़" बताई lऔर जौहरी ने इसे "बेसकीमती" बताया l
अब ऐसा ही मानवीय मूल्य का भी है l
तू बेशक हीरा है..!!लेकिन, सामने वाला तेरी कीमत,
अपनी औकात - अपनी जानकारी - अपनी हैसियत से लगाएगा।
घबराओ मत दुनिया में.. तुझे पहचानने वाले भी मिल जायेगे।
अब अगर आप अपनी कीमत समझ गए हो तो स्वार्थ लालच चाहत से जितना दूर होंगे उतना कम ठगे जाएंगे, और ठगता कौन है जिसने आपसे अधिक यहाँ भौतिक वस्तुओँ का भण्डारण कर रखा है, इसका मतलब यह नहीं कि वह आपसे श्रेष्ठ है, श्रेष्ठ तो वह है जिसने प्रकृत से मिले हुए खजाने को बचा रखा है।
इस धरती पर जीवित रहने मात्र से आपको लेना पड़ता है मगर ऐसा नहीं कि आपका एश्वर्य इससे कम होगा, आप खुलकर जीवन यापन करें..! यहाँ लेने वाले सिर्फ आप ही नहीं है जैसे आप दूसरों से लेते है वैसे ही दूसरे भी आप से लेते है, और जब आप दूसरों को देते है तो आपका एश्वर्य वापस आता है। सोचने समझने की बात यह है कि जीवन में लेना थोड़ देना ज्यादा होना चाहिए।
Wednesday, 21 September 2016
आज़ादी अंग्रेजो से ली अब बारी है पाकिस्तान की। ये चाहत मेरी ही नहीं है चाहत भारत के आवाम की।।
आज़ादी दिलवाने वालों के अब भी है पूत यहाँ।
भारत की ही धरती है आबाद है पाकिस्तान जहाँ।।
आज़ादी अंग्रेजो से ली अब बारी है पाकिस्तान की।
ये चाहत मेरी ही नहीं है चाहत भारत के आवाम की।।
कुछ अणु बम बनाकर अब फूल रहा है पाकिस्तान।
ग़लती पर ग़लती करता मिट जाएगा नामो निशान।।
हिन्दुस्तांन की आज़ादी में क़ुरबानी को वह भूल रहा।
कुछ हथियार इकठ्ठा कर ख़ुद ही सपनो में झूल रहा।।
हिंदुस्तान की धरती पर उसको वीरों की याद नहीं।
परास्त करके सुनी मोहम्मद गोरी की फ़रियाद यही।।
खुद भी जब युद्ध किया तो हर बार हार का रस चीखा।
मगर माफ़ी देने से इस पाकिस्तान का होता मुँह फीका।।
कश्मीर का सपना पाले हिन्दुस्तान से ही जल जायेगा।
ये पड़ोस के क़ाबिल कहाँ अब बलूचिस्तान ही आयेगा।।
आज़ादी अंग्रेजो से ली अब बारी है पाकिस्तान की।
ये चाहत मेरी ही नहीं है चाहत भारत के आवाम की।।
Sunday, 4 September 2016
सिन्धु नदी के बिना हिन्दू वैसा ही है जैसे जल बिन मीन, प्राण बिन शारीर।
भारत का विभाजन हुआ और संपूर्ण सिन्धु नदी पाकिस्तान को मिल गई और उससे जुड़ी संपूर्ण संस्कृति और धर्म को अब नष्ट कर दिया गया है। सिन्धु के बिना हिन्दू वैसे ही है, जैसे प्राण के बिना शरीर, अर्थ के बिना शब्द हैं। गंगा से पहले हिन्दू संस्कृति में सिन्धु और सरस्वती की ही महिमा थी। सिन्धु से ही हिन्दुओं का इतिहास है। सिन्धु का अर्थ जलराशि होता है। सिन्धु नदी का भारत और हिन्दू इतिहास में सबसे ज्यादा महत्व है। इसे इंडस कहा जाता है इसी के नाम पर भारत का नाम इंडिया रखा गया।
3,600 किलोमीटर से ज्यादा लंबी और कई किलोमीटर चौड़ी इस नदी का उल्लेख वेदों में अनेक स्थानों पर है। इस नदी के किनारे ही वैदिक धर्म और संस्कृति का उद्गम और विस्तार हुआ है। वाल्मीकि रामायण में सिन्धु को महानदी की संज्ञा दी गई है। जैन ग्रंथ जंबूद्वीपप्रज्ञप्ति में सिन्धु नदी का वर्णन मिलता है।
सिन्धु की सहायक नदियां : सिन्धु की पश्चिम की ओर की सहायक नदियों- कुभा, सुवास्तु, कुमु और गोमती का उल्लेख भी ऋग्वेद में है। इस नदी की सहायक नदियां- वितस्ता, चन्द्रभागा, ईरावती, विपासा और शुतुद्री है। इसमें शुतुद्री सबसे बड़ी उपनदी है। शुतुद्री नदी पर ही एशिया का सबसे बड़ा भागड़ा-नांगल बांध बना है। झेलम, चिनाब, रावी, व्यास एवं सतलुज सिन्धु नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं। इनके अतिरिक्त गिलगिट, काबुल, स्वात, कुर्रम, टोची, गोमल, संगर आदि अन्य सहायक नदियां हैं।
सिन्धु का उद्गम और मार्ग : चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र के मार्ग का उपग्रह से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करने के साथ भारत-पाकिस्तान से बहने वाली सिन्धु और म्यांमार के रास्ते बहने वाली सालवीन और ईरावती के बहाव के बारे में भी पूरा विवरण जुटाया है।
नए शोध परिणामों के मुताबिक सिन्धु नदी का उद्गम तिब्बत के गेजी काउंटी में कैलाश के उत्तर-पूर्व से होता है। नए शोध के मुताबिक, सिन्धु नदी 3,600 किलोमीटर लंबी है, जबकि पहले इसकी लंबाई 2,900 से 3,200 किलोमीटर मानी जाती थी। इसका क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा है। सिन्धु नदी भारत से होकर गुजरती है लेकिन इसका मुख्य इस्तेमाल भारत-पाक जल संधि के तहत पाकिस्तान करता है।
पहले माना जाता था कि यह तिब्बत के मानसरोवर के निकट सिन-का-बाब नामक स्थान से सिन्धु नदी निकलती है। यह नदी हिमालय की दुर्गम कंदराओं से गुजरती हुई कश्मीर और गिलगिट से होती हुई पाकिस्तान में प्रवेश करती है। सिन्धु भारत से बहती हुई पाकिस्तान में 120 किमी लंबी सीमा तय करती हुई सुलेमान के निकट पाक-सीमा में प्रवेश करती है। पाकिस्तान के मैदानी इलाकों में बहती हुई यह नदी कराची के दक्षिण में अरब सागर में गिरती है।